आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई ने बुधवार को राष्ट्रपति और मंत्रीमंडल के सदस्यों से मुलाक़ात में कहा कि अमरीका, यूरोप और पूर्व सोवियत संघ तक ने इन चालीस बरसों में इस्लामी गणतंत्र ईरान के ख़िलाफ़ हर संभव कार्यवाही की लेकिन विफल रहे। उन्होंने अर्थव्यवस्था की तरफ़ इशारा करते हुए कच्चे तेल को विभिन्न उत्पादों में बदलने को, कच्चे तेल पर निर्भरता से छुटकारे का मुख्य रास्ता बताया और कहा कि कई बार कहा जा चुका है कि हम वैज्ञानिकों व उद्यमियों के सहारे गैस व पेट्रोल जैसे वर्तमान उत्पादों को भविष्य में अन्य उत्पादों से मिला सकते हैं जिससे उनका निर्यात मूल्य कच्चे तेल से कई गुना अधिक हो जाएगा।
इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई ने इस मुलाक़ात में कश्मीर के विषय की तरफ़ भी इशारा किया और इस क्षेत्र के मुसलमानों की स्थिति पर अप्रसन्नता व्यक्ति करते हुए कहा कि भारत सरकार से हमारे अच्छे संबंध हैं लेकिन हमारी अपेक्षा यह है कि भारत सरकार कश्मीर की सज्जन जनता के संबंध में न्यायूपूर्ण नीति अपनाए और इस क्षेत्र के मुसलमानों पर धौंस न जमाई जाए। उन्होंने कश्मीर की वर्तमान स्थिति और इस संबंध में भारत व पाकिस्तान के मतभेदों को, भारतीय उपमहाद्वीप से निकलते समय दुष्ट ब्रिटेन की कार्यवाहियों का परिणाम बताया और कहा कि अंग्रेज़ों ने कश्मीर में झड़पें जारी रखने के लिए जान बूझ कर इस क्षेत्र पर यह घाव लगाया।